Unnecessary Title!

अपनी बात कुछ कह पाने से डरता हूँ,
शब्दों की कुछ ऐसी तल्ख़ कमियाँ छाईं हैं
अल्फाज़ों को उन प्रोफाइल पिक्चरों में बदलता हूँ
शब्द अगर कभी मिल भी जाते हैं तो
स्टेटस मेसेज बन के रह जाते हैं वो
ये जद्दोजेहाद खुद से कुछ ऐसी छिड़ी है
की लड़ता हूँ खुद से
और खुद ही खुद से हार भी जाता हूँ

शब्द के आडम्बरों में अर्थ मेरा खो न जाये. Engineer,Ex-Fellow-Teach for India,Quizzing enthusiast, Runner, Like to write poems...and proud Indian.

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