Aaditya Tiwari

मंच पर सब पात्र हैं

सब रंग हैं

सब साथ हैं

थामे हैं हाथ कोई किसी का

कोई यूँही अकेले खड़ा है कहीं

दिल की बात कह रहा कोई

कोई दिल बहलाने को बतला रहा

कुछ सुन रहे

कुछ समझ रहे

कुछ और भी हैं

महसूस करने वाले

सारा प्रपंच है

और सबकी अपनी कहानी

कहने सुनने के इस सिलसिले में

रिश्ते गढ़ते जाते हैं

साथ बिताए समय को

यादों में संजों के रखते हैं

अंधेरी रातों में ये

तारों की तरह चमकते हैं

पात्र कुछ जाते हैं

नये किरदार आ जाते हैं

रंगमच का खेल

निरंतर चलता रहता है

मंच पर सब पात्र हैं

सब रंग हैं।

सब साथ हैं।।

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Aaditya Tiwari

Aaditya Tiwari

शब्द के आडम्बरों में अर्थ मेरा खो न जाये. Engineer|Ex-Teach for India|India Foundation| OSD to CM-Arunachal Pradesh| Quizzer| Runner| Write Poems|